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NCERT Solutions for Class VI Roochira Part 01 Sanskrit Chapter 07 -Bakasy prateekaarah (avyayaprayogah)


बकस्य प्रतीकारः (अव्ययप्रयोगः)

Exercise : Solution of Questions on page Number : 43


प्रश्न 1: उच्चारणं कुरुत-

यत्र           यदा              अपि            अहर्निशम्
तत्र            तदा             अद्य             अधुना
कुत्र           कता              श्वः              एव
अत्र           एकदा            ह्यः              कुतः
अन्यत्र        च              प्रातः          सायम्

उत्तर 1: विद्यार्थी इसका उच्चारण स्वयं करें।


Exercise : Solution of Questions on page Number : 44


प्रश्न 2: मञ्जूषातः उचितम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-

अद्य    अपि    प्रातः     कदा       सर्वदा       अधुना

(क) ……………………. भ्रमणं स्वास्थ्याय भवति।

(ख) ……………………. सत्यं वद।

(ग) त्वं ………………… मातुलगृहं गमिष्यसि?

(घ) दिनेशः विद्यालयं गच्छति, अहम् ………………………. तेन सह गच्छामि।

(ङ) ……………………….. विज्ञानस्य युगः अस्ति।

(च) ……………………….. रविवासरः अस्ति।

उत्तर 2:

(क) प्रातः भ्रमणं स्वास्थ्याय भवति।

(ख) सर्वदा सत्यं वद।

(ग) त्वं कदा मातुलगृहं गमिष्यसि?

(घ) दिनेशः विद्यालयं गच्छति, अहम् अपि तेन सह गच्छामि।

(ङ) अधुना विज्ञानस्य युगः अस्ति।

(च) अद्य रविवासरः अस्ति।


प्रश्न 3:

अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरं लिखत-

(क) शृगालस्य मित्रं कः आसीत्?

(ख) स्थालीतः कः भोजनं न अखादत्?

(ग) बकः शृगालाय भोजने किम् अयच्छत्?

(घ) शृगालस्य स्वभावः कीदृशः भवति?

उत्तर 3:

(क) शृगालस्य मित्रं बकः आसीत्।

(ख) स्थालीतः बकः भोजनं न अखादत्।

(ग) बकः शृगालाय भोजने संकीर्णमुखे कलशे क्षीरोदनम् अयच्छत्।

(घ) शृगालस्य स्वभावः कुटिलस्वभावः भवति।


प्रश्न 4:

पाठात् पदानि चित्वा अधोलिखितानां विलोमपदानि लिखत-

यथा – शत्रुः – मित्रम्

सुखदम् ………… दुर्व्यवहारः ………..

शत्रुता ………… सायम् ………..

अप्रसन्नः ………… असमर्थः …………

उत्तर 4:

सुखदम्          दुखदम्               दुर्व्यवहारः         सद्व्यवहारः

शत्रुता         मित्रता               सायम्              प्रातः

अप्रसन्नः     प्रसन्नः               असमर्थः          समर्थ


Exercise : Solution of Questions on page Number : 45


प्रश्न 5:

मञ्जूषातः समुचितपदानि चित्वा कथां पूरयत-

मनोरथैः     पिपासितः    उपायम्    स्वल्पम्    पाषाणस्य         कार्याणि
उपरि       सन्तुष्टः      पातुम्       इतस्ततः          कुत्रापि

     

 

एकदा एकः काकः ……………………. आसीत्। सः जलं पातुम् ……………………. अभ्रमत्। परं ……………………… जलं न प्राप्नोत। अन्ते सः एकं

घटम् अपश्यत्। घटे ……………………….. जलम् आसीत्। अतः सः जलम् …………………………. असमर्थः अभवत्। सः एकम् …………………

अचिन्तयत्। सः ……………………………….. खण्डानि घटे अक्षिपत्। एवं क्रमेण घटस्य जलम् ……………………… आगच्छत्। काकः जलं पीत्वा

………………………… अभवत्। परिश्रमेण एव ………………………….. सिध्यन्ति न तु ………………………………..।

उत्तर 5:

   

 

एकदा एकः काकः पिपासितः आसीत्। सः जलं पातुम् इतस्ततः अभ्रमत्। परं कुत्राणि जलं न प्राप्नोत। अन्ते सः एकं घटम् अपश्यत्। घटे स्वल्पम् जलम्

आसीत्। अतः सः जलम् पातुम् असमर्थः अभवत्। सः एकम् उपायम् अचिन्तयत्। सः पाषाणस्य खण्डानि घटे अक्षिपत्। एवं क्रमेण घटस्य जलम् उपरि

आगच्छत्। काकः जलं पीत्वा संतुष्टः अभवत्। परिश्रमेण एव कार्याणि सिध्यन्ति न तु मनोरथैः।


प्रश्न 6:

तत्समशब्दान् लिखत-

यथा- सियार शृगालः

कौआ         ………………

मक्खी       ………………

बन्दर         ………………

बगुला       ………………

चोंच          ………………

नाक          ………………

उत्तर 6:

सियार         शृगालः

कौआ          काकः

मक्खी         मक्षिकाः

बन्दर           वानरः

बगुला          बकः

चोंच            चञ्चुः

नाक            नासिकाः